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सरल तरीके से ज्योतिष सीखते हैं

                                            सरल तरीके से ज्योतिष सीखते हैं - पार्ट --1 

मित्रों नमस्कार!

आइए हम सरल तरीके से ज्योतिष सीखते हैं, विश्वास मानिये आप जरूर सीख सकते हैं।

आज हम सीखते हैं कुंडली क्या होती है.?

सरल भाषा में जातक के जन्म-समय में ब्रह्माण्ड में ग्रहों, नक्षत्रों की स्थिति को जन्मकुंडली कहते हैं, या यूँ कहें कि ये हमारे जन्म समय के ग्रहों की घरों में स्थिति का नक्शा है, इसे ही जन्म कुंडली कहते हैं। 

जन्मकुंडली में 12 घर या भाव होते हैं। 

पहला घर : इस घर (भाव) या 1st हाउस को लग्न कहते हैं।

ये हम यानि ख़ुद, हमारा शरीर,  हमारा व्यक्तित्व, स्वास्थ्य, शारीरिक बनावट, स्वभाव, गुण,  विद्या, मस्तिष्क, आकृति, सूर्य इस घर का कारक ग्रह है

दूसरा घर :  इसे धन, कुटुंब (परिवार), वाणी, वाकपटुता, बोलने की कला, क्षमता, दाहिनी आँख को दर्शाता है। इससे हम जीभ, नाक और चेहरे का विचार भी कर सकते हैं, गुरु ग्रह इस घर का कारक है।

तीसरा घर  : इसे पराक्रम, साहस, छोटे भाई-बहिन, छोटी यात्रा, संचार,  लॉटरी, जोखिम लेने की क्षमता, गर्दन, कंधे, हाथ का भी विचार किया जाता है, मंगल इस घर का कारक ग्रह है।

चोथा घर  :  माँ, जन्मभूमि, भूमि, घर, सुख, सुविधा,  वाहन, जनता, गड़ा धन, भावना, जनसेवा,  मानसिक शांति, कृषि कार्य, चन्द्रमा इस घर का कारक ग्रह है।

पांचवा घर  : संतान, शिक्षा, प्रेम, पूर्व जन्मों का क्रम, बुद्धि, 

प्रथम संतान और गर्भाधान, रहस्य, पिता के पुण्य कर्म, नम्रता, राजा, मंत्री, धन मिलने के उपाय, समाचार पत्र लिखना,  लॉटरी, सट्टा,  आकस्मिक धन, पूर्व जन्म की स्थिति, महान इष्ट कार्य, वैभव,  विचार शक्ति, यश-अपयश, 

आध्यात्मिक रुचि। 

छटा घर  : रोग, कर्ज़, शत्रु,  कफ, नौकरी, प्रतियोगिता, बदनामी, अपयश, मौसी, हानि, अपने बंधुओं से विरोध,  चोट, दुर्घटना, अनायास नौकरी छुटना, इसका कारक ग्रह मंगल है।

सातवाँ घर  :  स्त्री, ससुराल, पति, पत्नी, कामेच्छा, विवाह, मामा की स्थिति, व्याभिचार स्त्री से शत्रुता,  सौभाग्य, संगीत, फूल, पौष्टिक पदार्थों का सेवन, पार्टनरशिप, बिजनेस, लाभ-हानि, पति-पत्नी संबंध, कामक्रीड़ा, कोर्ट केस, जननेंद्रिय सम्बन्धित रोग,  वीर्य (Semen), पवित्रता, गोद लिया पुत्र,  दूसरा बच्चा,  मारक स्थान,  मूत्र, मीठा पेय, शुक्र इस घर का कारक है।


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